JCB Prize for Literature: भारत का सबसे बड़ा साहित्यिक पुरस्कार – JCB Prize for Literature – अब नहीं मिलेगा। यह खबर 21 जून को सामने आई जब JCB Literature Foundation ने अपने लाइसेंस को रद्द करने की जानकारी दी। इसके साथ ही आधिकारिक रूप से यह पुरस्कार बंद कर दिया गया। यह खबर सुनकर देश के साहित्य प्रेमियों और लेखकों में मायूसी छा गई।
क्या था JCB Prize for Literature?

JCB Prize for Literature की शुरुआत 2018 में हुई थी। यह पुरस्कार हर साल उस भारतीय लेखक को दिया जाता था, जिसने अंग्रेजी में या भारतीय भाषाओं से अनुवादित कोई शानदार उपन्यास लिखा हो। यह पुरस्कार JCB इंडिया नाम की कंपनी देती थी, जो निर्माण मशीनों के लिए जानी जाती है। इस पुरस्कार का मकसद भारतीय साहित्य को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय भाषाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था।
पुरस्कार में कितनी राशि मिलती थी?
JCB Prize for Literature को भारत का सबसे अमीर साहित्यिक पुरस्कार माना जाता था। इसमें मिलने वाली राशि कुछ इस तरह थी:
- जीतने वाले लेखक को मिलते थे ₹25 लाख।
- अगर किताब अनुवाद थी, तो अनुवादक को मिलते थे ₹10 लाख।
- शॉर्टलिस्ट हुए बाकी लेखकों को मिलते थे ₹1 लाख।
- शॉर्टलिस्ट अनुवादकों को मिलते थे ₹50,000।
क्यों बंद हुआ JCB साहित्य पुरस्कार?
JCB Prize discontinued: JCB Literature Foundation का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। यह फाउंडेशन अब एक Private Limited कंपनी बन गई है। इसका मतलब है कि अब वह एक गैर-लाभकारी संस्था नहीं रही। फाउंडेशन ने कंपनी रजिस्ट्रार को खुद यह अनुरोध भेजा था कि उसका लाइसेंस रद्द किया जाए और नाम में से “Foundation” हटाकर “Private Limited” जोड़ा जाए। हालांकि, पुरस्कार को बंद करने की वजह पर किसी ने खुलकर कुछ नहीं कहा है।
कौन-कौन से लेखक जीत चुके हैं यह पुरस्कार?

JCB Prize winners: 2018 से 2024 तक कुल 7 लेखकों को यह पुरस्कार मिला। इनमें से 5 किताबें भारतीय भाषाओं से अनुवादित थीं। यह हैं वे किताबें और लेखक:
- 2018: Jasmine Days – लेखक: बेन्यामीन (अनुवाद: शहनाज़ हबीब) [मलयालम]
- 2019: The Far Field – लेखिका: माधुरी विजय
- 2020: Moustache – लेखक: एस. हरीश (अनुवाद: जयश्री कलातिल) [मलयालम]
- 2021: Delhi: A Soliloquy – लेखक: एम. मुकुंदन (अनुवाद: फातिमा ईवी, नंदकुमार के) [मलयालम]
- 2022: The Paradise of Food – लेखक: खालिद जावेद (अनुवाद: बारन फारूकी) [उर्दू]
- 2023: Fire Bird – लेखक: पेरूमल मुरुगन (अनुवाद: जननी कन्नन) [तमिल]
- 2024: Lorenzo Searches for the Meaning of Life – लेखक: उपमन्यु चटर्जी
लेखकों और अनुवादकों ने क्या कहा?
- पेरूमल मुरुगन ने कहा – “यह भारतीय भाषाओं के लिए बहुत बड़ा झटका है। JCB Prize ने अनुवाद को सम्मान दिया और क्षेत्रीय लेखकों को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।”
- एम. मुकुंदन ने कहा – “हम सिर्फ क्षेत्रीय लेखक हुआ करते थे। इस पुरस्कार ने हमें ‘भारतीय लेखक’ बना दिया। अब यह बंद होना बहुत दुखद है।”
- खालिद जावेद, जिन्होंने 2022 में यह पुरस्कार जीता था, बोले – “JCB Prize ने भारतीय साहित्य को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए था। मुझे लगता है इस फैसले की समीक्षा होनी चाहिए।”
क्यों था यह पुरस्कार खास?
JCB Prize for Literature का मकसद सिर्फ अंग्रेज़ी में लिखने वालों को नहीं, बल्कि अन्य भारतीय भाषाओं में लिखे गए शानदार उपन्यासों को भी पहचान देना था। इस पुरस्कार ने अनुवादकों को भी सम्मानित किया, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं में लिखने वाले लेखक और अनुवादक दोनों को फायदा मिला। जहां पहले अंग्रेज़ी लेखकों को ही मुख्यधारा में जगह मिलती थी, वहीं इस पुरस्कार ने तमिल, मलयालम, उर्दू जैसे भाषाओं को भी बराबरी का दर्जा दिलाया।
बिना अलविदा कहे गायब हो गया यह पुरस्कार

भारत का सबसे बड़ा साहित्य सम्मान, JCB Prize for Literature, को भारतीय बुकर्स की तरह देखा जाता था। हर साल इसकी घोषणा का इंतज़ार होता था। जूरी, चयन प्रक्रिया और प्रचार-प्रसार सब कुछ शानदार होता था। लेकिन 2025 में न तो कोई घोषणा हुई, न अलविदा कहा गया। पुरस्कार बस अचानक से गायब हो गया।
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